घड़ी के बारे में जानकारी

घड़ी एक ऐसी पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जिसकी सहायता से हम अपना कोई भी कार्य समय पर करते है, समय का नाम जब आप लेते है तो तब घड़ी का नाम भी लिया जाता है क्योकी घड़ी से ही हम समय को देख पाते है। घड़ी के बिना हम अपना कोई भी कार्य समय पर नही कर पाते है, लेकिन हजारो साल पहले जब घड़ी नही थी तो पहले के लोग समय का पता सूरज की किरणों से लगते थे, लेकिन सूरज की किरणों से सिर्फ तीन बार ही समय का पता लगाया जाता था (सुबह, दोपहर, शाम) और इसके बीच के समय का पता नहीं लगाया जा सकता था। लेकिन घड़ी की सहायता से आप एक-एक समय का पता लगा सकते है। घड़ी में तीन सुईया होती है (1) घंटे की (2) मिनट की (3) सेकेंड की, घड़ी में 12-24 घंटे होते है लेकिन एक दिन में 24 घंटे और 1 घंटे में 60 मिनट 1 मिनट में 60 सेकेंड होता है लेकिन 1 सेकेंड में 100 नैनो सेकेंड होता है। घड़ी को हम कही पर भी ले जा सकते है और उसे अपने हाथों में भी पहन सकते है, घड़ी को व्यक्ति की गतिविधियों के कारण होने वाले गति के बावजूद भी एक निरंतर गति को बनाये रखने के लिए इसे बनाया गया है। घड़ी को कलाइयों के चारो ओर से पहना जा सकता है इसको पहनने के लिए वॉच स्ट्रैप या अन्य प्रकार के ब्रेसलेट से जोड़ा जाता है। घड़ी को हिंदी में "समय सूचक यंत्र" कहते हैं और अंग्रेजी में "watch या clock" कहते है।

Watch

घड़ी का अविष्कार कब हुआ-

घड़ी का अविष्कार कब हुआ था ये बताना तो मुश्किल है लेकिन घड़ी के मिनट वाली सुई का अविष्कार 1577 में जॉस बर्गी ने स्विट्जरलैंड मे अपने एक खगोलशास्त्र मित्र के लिए किया था, लेकिन उससे पहले जर्मनी के न्यूरमबर्ग शहर में पीटर हेनलेन ने एक ऐसी घड़ी बना ली थी जिसको एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाया जा सकता था।

घड़ी का अविष्कार किसने किया था-

घड़ी का अविष्कार तो सदियों पहले ही हो गया था लेकिन इसको सिर्फ एक जगह ही रखा जा सकता था, और घड़ी का अविष्कार तो सन् 996 में पॉप सिलवेस्टर से ही शुरू हो गया था इसका अविष्कार बहुत सारे वैज्ञानिको ने किया लेकिन कोई भी घड़ी को सही तरीके से नही बना पाया। इसके बाद पीटर हेनलेन ने 15 वी सताब्दी में घड़ी को सही तरीके से बनाया जिसको एक जगह से दूसरे जगह ले जाया जा सकता था। पीटर हेनलेन का जन्म सन् 1485 में जर्मनी के न्यूरेमबर्ग शहर में हुआ था इनके पिता का नाम भी पीटर हेनलेन था और इनकी माता का नाम बारबरा हेनलीन था। लेकिन पीटर हेनलेन की तीन शादियां हुई थी इनकी पत्नी का नाम कुंडिगंडे अर्न्स्ट और दूसरी का मार्गरेते तथा तीसरी पत्नी का बालबर्ग श्रेयर था। पीटर जर्मनी के न्यूरेमबर्ग शहर में पहले ताला बनाते थे, फिर इसके बाद पीटर हेनलेन ने अपनी घड़ी का अविष्कार सन् 1505 में उत्तरी पुनर्जागरण के हिस्से के रूप में शुरुआती जर्मन पुनर्जागरण काल मे किया था। यह दुनिया की सबसे पुरानी घड़ी है जो आज भी काम करती है। फिर पीटर हेनलेन का अगस्त में सन् 1542 ईस्वी में देहांत हो गया। फिर धीरे-धीरे घड़ी के सभी सुइयों का अविष्कार सन् 1700 तक हो गया।
कितेने लोगो ने घड़ी का अविष्कार किया था-
सर्व प्रथम पहली घड़ी का अविष्कार सन् 996 ईस्वी में पॉम सिलवेस्टर ने किया था, दूसरी घड़ी का अविष्कार चीन में हुआ था, तीसरी घड़ी का अविष्कार 1288 में इंग्लैंड में किया गया था, 1326 में अलावैन्स में घड़ी लगाई गई थी, पीटर हेनलेन ने 1505 में घड़ी का अविष्कार किया था, लेकिन घड़ी के मिनट वाली सुई का अविष्कार 1577 में जॉस बर्गी ने स्विट्जरलैंड में किया था।
घड़ी कितनी प्रकार की होती है-
घड़ी कई प्रकार की होती है जो मारकेट में आप को बहुत सारी डिजाइनों में अलग-अलग प्रकार की मिल सकती है, लेकिन घड़ी लगभग 8 प्रकार की होती है।
सूर्य घड़ी (sun watch)
जल घड़ी (water watch)
यान्त्रिक घड़ी (Mechanical watch)
स्मार्ट घड़ी (smart watch)
हाथ घड़ी (hand watch)
जेब घड़ी (pocket watch)
दीवाल घड़ी (wall watch)
रेत घड़ी (the sand watch)
सूर्य घड़ी (Sun watch)-
सूर्य घड़ी को एक जगह धूप में रखा जाता था इसपर जब सूर्य की रोशनी पड़ती थी तब इससे समय का पता चलता था इस घड़ी का आकार गोल था इसको एक लकड़ी पर बनाया गया था लकड़ी के ऊपर रोमन अंको में चिन्ह अंकित किया गया था इसके बीच में एक लंबी लकड़ी होती थी जिसके ऊपर सूर्य की रोशनी पड़ती थी तो उसी से समय को देखा जाता था, जैसे-जैसे सूर्य घूमता जाता था वैसे ही समय बदलता जाता था। जब इस घड़ी पर धूप नही पड़ती थी तब इससे समय का पता नहीं चलता था।
जल घड़ी (water watch)-
जल घड़ी को आप कही पर भी रख सकते है इसमें समय का पता किसी भी समय लगाया जा सकता था चाहे कोई भी मौसम हो इस घड़ी को चीन के देशवासियों ने बनाया था इसको लेहे से बनाया गया था, इसका आकार गोल और लंबा था इसके ऊपर लोहे का कूप बना हुआ था जिसके ऊपर चिन्ह अंकित किया गया था और उसके अंदर पानी भरा जाता था और उसके नीचे एक कटोरी रखी जाती थी, जैसे-जैसे पानी गिरता जाता था वैसे-वैसे समय बढ़ाता जाता था जिससे समय का अनुमान लगाया जाता था।
यान्त्रिक घड़ी (Mechanical watch)-
Mechanicl watch

यान्त्रिक घड़ी एक प्रकार की घड़ी है जो समय बताने के लिए घड़ी की कल की प्रणाली का उपयोग करती है, यह क्वॉर्टर्ज घड़ियों के विपरीत है जो इलेक्ट्रॉनिक रुप से एक छोटी बैटरी का उपयोग करती है या रेडियो घड़ियों के माध्यम से कार्य करती है एक यान्त्रिक घड़ी मेनस्प्रिंग द्वारा कार्य करती है जिसे समय-समय पर अपने हाथ से स्वयं घुमाया जाता है। इसका बल बैलेंस व्हील की शक्ति श्रृंखला के माध्यम से प्रेरित किया जाता है, यान्त्रिक घड़ी का अविष्कार 15वी सताब्दी में ही हो गया था लेकिन इसको 17वी सताब्दी में पूरी तरह से बना दिया गया और सभी सुइयों को लगा दिया गया।

स्मार्ट घड़ी (smart watch)-
Smart watch

स्मार्ट घड़ी एक ऐसी घड़ी है जिसकी मदत से आप न केवल समय ही देख सकते है बल्कि इससे आप अपनी शरीर का भी ख्याल रख सकते है। स्मार्ट घड़ी अन्य घड़ियों से ज्यादा महंगी होती है और आप इसमें गाना भी सुन सकते है और वीडियो भी देख सकते है और बहुत सारे कार्य कर सकते है, इसका अविष्कार जापानी कम्पनी सिको ने 10 जून 1998 में किया था। इससे आप अपना हार्ट विट भी चेक कर सकते है।
हाथ घड़ी (hand watch)-
हाथ घड़ी वह घड़ी है जिसको आप अपनी कलाई में पहन सकते है हाथ घड़ी को बनाने के लिए किसी महंगे चेन, रबड़, कपड़ा का उपयोग किया जाता है कलाई घड़ी में एक छोटी सी बैटरी होती है जो घड़ी को चलती है अगर आप चाहे तो यान्त्रिक घड़ी को भी हाथो में पहन सकते है और स्मार्ट वॉच को भी हाथो में पहन सकते है। लेकिन समय तो आप किसी भी घड़ी से देख सकते है लेकिन कलाई घड़ी को लोग फैसन के लिए पहनते है।
जेब घड़ी (pocket watch)-
जेब घड़ी एक प्रकार की घड़ी है जिसका उपयोग सालो पहले किया जाता था लेकिन कुछ लोग आज भी जेब घड़ी का उपयोग करते है। जेब घड़ी को 15वी सताब्दी में ही पीटर हेनलेन के द्वारा बना दिया गया था ये घड़ी काफी महंगी थी लेकिन समय के साथ ये सस्ती हो गई। इसका उपयोग तब किया जाता था जब कलाई घड़ी का अविष्कार नही हुआ था।
दीवाल घड़ी (wall watch)-
दीवाल घड़ी का उपयोग अक्सर लोग अपने घरों में, ऑफिस में, कारखानों में इत्यादि जगहों पर किया जाता है, यह काफी बड़ा होती है  इसको हम इसलिए लगते है कि किसी भी समय आसानी से समय देख सके चाहे काम कर रहे हो, पढ़ाई कर रहे हो इत्यादि, यह ज्यादा महंगी नही होती है इसको आप आसानी से खरीद सकते है।
रेत घड़ी (the sand watch)-
रेत घड़ी एक ऐसी घड़ी है जिसको एक रेत से बनाया गया था इस घड़ी में बनने के लिए एक लकड़ी का स्टैंड होता था और इसके बीच में एक ऐसा कॉच होता था जो दोनों तरफ से गोल और मोटा था और बीच में बहुत ही पतला छिद्र था और इसके अंदर रेत को भर दिया जाता था, रेत इसके एक तरफ से दूसरी तरफ बहुत धीमी गति से गिरता था जिससे समय का पता लगाया जाता था।
आज के इस युग मे घड़ी से न केवल समय देखा जा सकता है बल्कि इसकी सहायता से अलार्म लगाकर सुबह जल्दी उठ सकते है और अगर आप चाहे तो अलार्म की घंटी को भी बदल सकते है।